कक्षा 10 विज्ञान – कक्षा 10वीं के छात्र हमारे इस पेज से विज्ञान के NCERT SOLUTIONS प्राप्त कर सकते हैं। कक्षा 10 विज्ञान के अध्याय जैव प्रक्रम के नोट्स इस पेज पर नीचे दिये गये हैं। अगर आप परीक्षा में पूछे जानें वाले महत्त्वपूर्ण प्रश्न जानना चाहते हैं तो 10वीं विज्ञान के NCERT SOLUTIONS डाउनलोड कर सकते हैं। NCERT SOLUTIONSकी सहायता से आप अपनी परीक्षा की तैयारी और अच्छे से कर सकते हैं। छात्र NCERT SOLUTIONS में दिए महत्त्वपूर्ण प्रश्नों को हल कर सकते हैं। प्रश्नों को हल करने के बाद आप अपने उत्तरों की जांच भी आसानी से कर सकते हैं। सभी प्रश्नों के उत्तर भी NCERT SOLUTIONS में दिये गए हैं। कक्षा 10वी के छात्रों को बता दें कि आप NCERT SOLUTIONS और VVI प्रश्नों के साथ – साथ इस Page पर Reading कर सकते हैं। छात्र रोज एक page को हल करने की कोशिश करें। अधिक जानकारी के लिए पेज को पूरा पढ़ें।
- Class:- 10th
- Subject:- science (जैव प्रक्रम, life process)
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| Chapter 6 Life Process |
(अध्याय-6)(जैव प्रक्रम)
Page 105
प्रश्न 1 : हमारे जैसे बहुकोशिकीय जीवों में ऑक्सीजन की आवश्यकता पूरी करने में विसरण क्यों अपर्याप्त है ?उत्तर 1
: हम जानते है कि एक कोशिक जीवों की पूरी सतह पर्यावरण के सम्पर्क में रहती है । इन्हें भोजन ग्रहण करने के लिए , गैसों का आदान - प्रदान करने के लिए तथा व्यर्थ पदार्थों के निष्कासन के लिए किसी विशेष अंग की आवश्यकता नहीं होती है । परन्तु बहुकोशिकीय जीवों में सभी कोशिकाएँ अपने आसपास के पर्यावरण के सम्पर्क में नहीं रह सकती हैं । अतः , साधारण विसरण बहुकोशिकीय जीवों में ऑक्सीजन की आवश्यकता की पूर्ति नहीं कर सकता है ।
प्रश्न 2 : कोई वस्तु सजीव है , इसका निर्धारण करने के लिए हम किस मापदंड का उपयोग करेंगे ?
उत्तर 2
: कोई वस्तु सजीव है या नहीं , इसका निर्धारण करने के लिए कई मापदंडो का उपयोग करते हैं । हम जानते है कि सजीवों में समय के अनुसार उनमें वृद्धि , प्रजन्न एवं श्वसन की क्रिया निरंतर होती है । सजीवों के शरीर के अंदर आणविक गतियाँ लगातार होती रहती हैं चाहे वह बाह्य रूप से स्थिर तथा शांत ही क्यों न हो ।
प्रश्न 3 : किसी जीव द्धारा किन कच्ची सामग्रियों का उपयोग किया जाता है ?
उत्तर 3
: हम जानते है कि जीवों को अपना जीवन यापन करने के लिए ऊर्जा की आवश्यकता होती है । अतः , ऊर्जा की आवश्यकता की पूर्ति करने के लिए प्रत्येक जीव विभिन्न स्रोतों से कच्ची समाग्रियों का उपयोग करते है , जो इस प्रकार
- वायुमंडल से ऑक्सीजन
- पृथ्वी से जल एवं
- सूर्य प्रकाश इत्यादि ।
उत्तर 4
: किसी भी जीव में जीवन के अनुरक्षण के लिए ऊर्जा की अहम भूमिका होती है । इस ऊर्जा को प्रत्येक जीव अपने भोजन के माध्यम से प्राप्त करते है । भोजन से उर्जा तक निम्नलिखित प्रक्रम आवश्यक हैं :
- पोषण
- श्वशन
- वहन
- उत्सर्जन
(अध्याय-6)(जैव प्रक्रम)
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प्रश्न 1 : स्वयंपोषी पोषण तथा विषमपोषी पोषण में क्या अंतर है ? .उत्तर 1
: स्वयंपोषी पोषण उन जीवों के पोषण की प्रक्रिया है जो अपना भोजन प्रकाश संश्लेषण की क्रिया द्वारा स्वयं बनाते हैं । भोजन के लिए कच्चे पदार्थों जैसे वायुमंडल से कार्बन डाईऑक्साइड , जल तथा सूर्य के प्रकाश आदि का उपयोग कर पतियों में उपस्थित क्लोरोफिल की सहायता से भोजन बनाते है । उदाहरण : हरे पौध तथा कुछ जीवाणु । विषमपोषी पोषण उन जीवों का पोषण है जो अपना भोजन स्वयं नहीं बनाते हैं बल्कि अन्य जीवों पर आश्रित रहत है । उदाहरण : मानव , पशु , पक्षी आदि ।
प्रश्न 2 : प्रकाश संश्लेषण के लिए आवश्यक कच्ची सामग्री पौधा कहाँ से प्राप्त करता है ?
उत्तर 2
: प्रकाश संश्लेषण के लिए आवश्यक कच्ची सामग्री पौधे निम्नलिखित श्रोतों से प्राप्त करते है :
- वायुमंडल से कार्बन डाईऑक्साइड
- सूर्य से सूर्य का प्रकाश
- भूमि से ( जाइलम एवं फ्लोयम द्वारा ) जल एवं खनीज लवण इन सभी सामग्रियों तथा पतियों में उपस्थित क्लोरोफिल की सहायता से पौधे अपना भोजन तैयार करते हैं ।
प्रश्न 3 : हमारे आमाशय में अम्ल की भूमिका क्या है ?
उत्तर 3
: हमारे आमाशय में अम्ल की निम्नलिखित भूमिकाएं हैं : आमाशय की भिति में उपस्थित जठर ग्रंथियों द्वारा स्रावित हाइड्रोक्लोरिक अम्ल एक अम्लीय माध्यम तैयार करता है जो पेप्सिन एंजाइम की क्रिया भी सहायक होता है । हाइड्रोक्लोरिक अम्ल भोजन में उपस्थित हानिकारक जीवाणुओं का भी नाश करता है ।
प्रश्न 4 : पाचक एंजाइमों का क्या कार्य है ।
उत्तर 4
: जैव उत्प्रेरकों द्वारा भोजन को पचने एवं अवशोषित करने के लिए इसे छोटे - छोटे अणुओं में विखंडित करने की क्रिया को एंजाइम कहते हैं । एमीलेस , लाइपेज , पेप्सिन , ट्रिप्सिन आदि पाचन एंजाइम जटिल पदार्थों कणों को छोटे - छोटे अणुओं में विखंडित करने में मदद करते हैं । ये सरल कण आसानी से रक्त द्वारा अवशोषित कर लिए जाते हैं और शरीर के सभी कोशिकाओं में पहुंचाया जा सकता है ।
प्रश्न 5 : पचे हुए भोजन को अवशोषित करने के लिए क्षुद्रांत्र को कैसी अभिकल्पित किया गया है ?
उत्तर 5
: पचे हुए भोजन को अवशोषित करने के लिए क्षुद्रांत के आंतरिक आस्तर पर अनेक अंगुली जैसे प्रवर्ध होते है जिन्हें दीर्घरोम कहते हैं । ये अवशोषण का सतही क्षेत्रफल बढ़ा देते हैं । दीर्घरीम में रुधिर वाहिकाओं की बहुतायत होती है जो भोजन को अवशोषित करके शरीर की प्रत्येक कोशिका तक पहुँचते हैं
(अध्याय-6)(जैव प्रक्रम)
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प्रश्न 1 : श्वसन के लिए ऑक्सीजन प्राप्त करने की दिशा में एक जलीय जीव की अपेक्षा स्थलीय जीव किस प्रकार लाभप्रद है ?उत्तर 1
: जलीय जीव जल में घुली ऑक्सीजन को विभिन्न अंगो द्वारा ग्रहण करके श्वसन की क्रिया करते है । जल में विलेय ऑक्सीजन की मात्रा वायु में ऑक्सीजन की मात्रा की तुलना में बहुत कम हैं इसलिए जलीय जीवों की श्वास दर स्थलीय जीवों की अपेक्षा द्रुत होती है । इसके विपरीत स्थलीय जीवों की श्वसन की क्रिया आसान तथा धीरे होती है ।
प्रश्न 2 : ग्लूकोज के ऑक्सीकरण से भिन्न जीवों में ऊर्जा प्राप्त करने के विभिन्न पथ क्या है ?
उत्तर 2
: ग्लूकोज के ऑक्सीकरण से ऊर्जा प्राप्त करने की निम्नलिखित तीन विधियां इस प्रकार हैं :
- ग्लूकोज कोशिका द्रव्य में विघटित होकर पायुरूवेट बनाता है जो दोबारा यीस्ट में ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में विघटित होकर इथेनॉल , कार्बन डाइऑक्साइड बनाता है और साथ ही ऊर्जा विमोचित भी होती है ।
- यदि ऑक्सीजन की कमी होती है , तो पायरूवेट विखंडित होकर लैक्टिक अम्ल एवं ऊर्जा प्रदान करता है ।
- पायरूवेट ऑक्सीजन की उपस्थिति में माइटोकॉन्डिया के अंदर विखडिंत होकर जल बनाता है और साथ ही ऊर्जा विमोचित भी करता है ।
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| चित्र 6.8 भिन्न पथों द्वारा ग्लूकोज का विखंडन |
प्रश्न 3 : मनुष्यों में ऑक्सीजन तथा कार्बन डाइऑक्साइड का परिवहन कैसे होता है ?
उत्तर 3
: मनुष्यों में ऑक्सीजन तथा कार्बन - डाइऑक्साइड का परिवहन रक्त में उपस्थित हीमोग्लोबिन के द्वारा होता है । फेफड़ों । से रक्त हीमोग्लोबिन ऑक्सीजन को लेकर सम्पूर्ण अंगो तक पहुँचती है तथा उत्तकों से कार्बन डाइऑक्साइड शोषित होकर रक्त द्वारा फेफड़ों तक पहुँचती है । फेफड़ों में कुपिकाएँ होती हैं जहाँ आक्सीजन तथा कार्बन डाइऑक्साइड का आदान प्रदान होता है । वायुकोषों की कुपिकाएँ इस कार्बन - डाइऑक्साइड को अलग कर देती है और अंत में कार्बन डाइऑक्साइड शरीर के बाहर निकल जाती है ।
प्रश्न 4 : गैसों के विनिमय के लिए मानव - फुफ्फुस में अभिकतम क्षेत्रफल को कैसे अभिकल्पित किया है ?
उत्तर 4
: गैसों के विनिमय के लिए मानव - फुफ्फुस में अंदर का भाग छोटी छोटी नलिकाओं में विभाजित हो जाता और एक गुब्बारे जैसी संरचना में अंतकृत हो जाता है । इस क्रिया को कूपिका फुफ्फुस कहते हैं । ये कुपिकाएँ ही गैसों के विनियम के लिए अधिकतम क्षेत्रफल की सतह उपलब्ध कराती हैं ।
(अध्याय-6)(जैव प्रक्रम)
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प्रश्न 1 : मानव में वहन तंत्र के घटक कौन से हैं ? घटकों के क्या कार्य है ?उत्तर 1
: मानव में वहन तंत्र के निम्नलिखित घटक हैं :
- रक्त : रक्त का काम शरीर के सम्पूर्ण भागों में भोजन से प्राप्त पोषक तत्वों तथा ऑक्सीजन को पहुँचाना है । यह कार्य रक्त में उपस्थित प्लाज्मा के द्वारा होता है । हृ
- हृदय : हृदय के मुख्य चार कोष्टक होते हैं जो ऑक्सीजनित रक्त तथा विओक्सिजनित रक्त को अलग करने में सहायक होते हैं । हृदय ऑक्सीजनित रक्त को शरीर के विभिन्न भागों में पहुंचाने का कार्य करता है ।
- नलिकाए : धमनी वे रुधिर वाहिकाओं है जो रुधिर को हृदय से शरीर के विभिन्न भागों तक ले जाने का कार्य करती हैं तथा शिराएँ विभिन्न अंगों से रुधिर एकत्र करके वापस हृदय में लाने का कार्य करती हैं ।
- प्लेटलेट्स : प्लेटलैट्स कोशिकाएँ रक्तश्राव के स्थान पर रुधिर का थक्का बनाकर मार्ग अवरुद्ध कर देती हैं ।
प्रश्न 2 : स्तनधारी तथा पक्षियों में ऑक्सीजनित तथा विऑक्सीजनित रुधिर को अलग करना क्यों आवश्यक है ?
उत्तर 2
: स्तनधारी तथा पक्षियों को विभिन्न कार्यों के लिए अधिक उर्जा की आवश्यकता होती है तथा ऊर्जा इन जीवों के शरीर के तापक्रम को भी बनाए रखने के लिए आवश्यक होती है । ऑक्सीजनित तथा विऑक्सीजनित रुधिर अलग - अलग रहने पर शरीर को उच्च दक्षता पूर्ण ऑक्सीजन उपलब्ध होती है । अतः , स्तनधारी तथा पक्षियों में ऑक्सीजनित तथा विऑक्सीजनित रुधिर को अलग करना आवश्यक है ।
प्रश्न 3 : उच्च संगठित पादप में वहन तंत्र के घटक क्या हैं ?
उत्तर 3
: उच्च संगठित पादपों में वहन तंत्र के मुख्य घटक जाइलम तथा फ्लोएम हैं । जाइलम का काम मृदा से प्राप्त जल एवं खनिज लवणों को पादपों में वहन करना और फ्लोएम का काम पादपों द्वारा प्रकाश संश्लेषण द्वारा बनाए गए भोजन को पादप के सम्पूर्ण भागों में पहुँचाना ।
प्रश्न 4 : पादप में जल और खनिज लवण का वहन कैसे होता है ?
उत्तर 4
: पादपों में जल तथा खनिज लवणों का वहन जाइलम के द्वारा होता है । जाइलम ऊतक में जड़ों , तनों और पत्तियों की वहिनिकाएँ तथा वाहिकाएं आपस में जुड़कर जल संवहक वाहिकाओं का एक सतत जाल भागों से सम्बद्ध होता है । जड़ो की कोशिकाएँ मृदा के सम्पर्क में होती हैं तथा वह सक्रिय रूप से आयन प्राप्त करती हैं । यह जड़ और मदा के बीच आयन सांद्रण में एक अंतर उत्पन करता है । इस अंतर को समाप्त करने के लिए मदा से जल तथा खनिज लवण जड़ में प्रवेश कर जाता है । इस प्रकार जल अनवरत गति से जड़ के जाइलम में जाता है और फिर जल के स्तंभ का निर्माण करता है जो लगातार ऊपर की ओर धकेला जाता है ।
प्रश्न 5 : पादप में भोजन का स्थानांतरण कैसे होता है ?
उत्तर 5
: किसी भी पादप में भोजन का स्थनांतरण फ्लोएम ऊतक द्वारा होता है । फ्लोएम ऊतक की कोशिकाएँ पादपों के सम्पूर्ण भागों तक फैली होती हैं । इसका काम पतियों द्वारा बनाए गए भोजन को पादपों के समस्त भागों तक पहुँचना होता है । इसके अलावा फ्लोएम अमीनो अम्ल तथा अन्य पदार्थों का भी परिवहन करता है । भोजन तथा अन्य पदार्थों का स्थनांतरण सलंग्न साथी कोशिका की सहायता से चालनी नलिका में उपरिमुखी तथा अधोमुखी दोनों दिशाओं में होता है । इसमें ऊर्जा का भी प्रयोग होता है जो ऊतक का परासरण दाब भी बढ़ा देता है जिससे जल इसमें प्रवेश कर जाता है और यह दाब पदार्थों को फ्लोएम से उस ऊतक तक ले जाता है जहाँ दाब कम हो जाता है ।
(अध्याय-6)(जैव प्रक्रम)
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प्रश्न 1 : वृक्काणु ( नेफ्रॉन ) की रचना तथा क्रियाविधि का वर्णन कीजिएउत्तर 1
: वृक्काणु मानव के उत्सर्जन तंत्र में एक महत्व पूर्ण अंग है । प्रत्येक वृक्क वृक्क में आधारी निस्पंदन एकक , फुफ्फुस की तरह ही , बहुत पतली भित्ति वाली रुधिर केशिकाओं का गुच्छ होता है । वृक्क में प्रत्येक गुच्छ , एक नलिका के कप के आकार के सिरे के अंदर होता है । यह नलिका छने हुए मूत्र को एकत्र करती है । प्रत्येक वृक्क में ऐसे अनेक निस्पंदन एकक होती हैं जिन्हें वृक्काणु ( नेफ्रॉन ) कहते हैं जो आपस में निकटता से पैक रहते हैं । प्रारंभिक निस्पंदन में कुछ पदार्थ जैसे ग्लूकोज़ , अमीनो अम्ल , लवण और प्रचुर मात्रा में जल रह जाते हैं । जैसे - जैसे मूत्र इस नलिका में प्रवाहित होता है इन पदार्थों का चयनित पुनरवशोषण हो जाता है । जल की मात्रा पुनरवशोषण शरीर में उपलब्ध अतिरिक्त जल की मात्रा पर तथा कितना विलेय वयं उत्सर्जित करना है , पर निर्भर करता है । प्रत्येक वृक्क में बनने वाला मूत्र एक लंबी नलिका , मूत्रवाहिनी में प्रवेश करता है जो वृक्क को मूत्राशय से जोड़ती है । मूत्राशय में मूत्र भंडारित रहता है जब तक कि फैले हुए मूत्राशय का दाब मूत्रमार्ग द्वारा उसे बहार न कर दे ।
प्रश्न 2 : उत्सर्जित उत्पाद से छुटकारा पाने के लिए पादप में किन विधियों का उपयोग करते हैं ?
उत्तर 2
: उतसर्जि उत्पाद से छुटकारा पाने के पादप निम्नलिखित विधियों का उपयोग करते हैं :
- प्रकाश संश्लेषण क्रिया के दौरान अतिरिक्त जल तथा आक्सीजन को बाहर निकल कर ।
- अतिरिक्त जल वाष्पोत्सर्जन द्वारा बाहर निकाल कर ।
- पौधे गिरने वाली पत्तियों में अपशिष्ट उत्पाद संचित रखते हैं और मृत पतियों को अलग कर अपशिस्ट पद्धार्थ को अलग करते हैं ।
- पौधे गोंद तथा रेजिन के रूप में अपशिस्ट पद्धार्थ को बहार निकलते हैं ।
- पुराने जाइलम जो अपशिष्ट पदार्थ है वह पादपों से छाल के रूप में बहार निकलता है ।
- पौधे कुछ अपशिष्ट पदार्थों को अपने आसपास की मृदा में उत्सर्जित करते हैं ।
प्रश्न 3 : मूत्र बनने की मात्रा का नियमन किस प्रकार होता है ?
उत्तर 3
: मूत्र बनने की मात्रा शरीर में उपस्थित अतिरिक्त जल और शरीर में घुली अपशिष्ट की मात्रा पर निर्भर करती है । कुछ अन्य कारक जैसे जीव के निवास स्थान तथा उसमें उपस्थित हार्मोन भी बनने वाले मूत्र की मात्रा को नियंत्रित करते हैं ।
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(अध्याय-6)(जैव प्रक्रम)
अभ्यास के प्रश्न उत्तर
प्रश्न 1 : मनुष्य में वृक्क एक तंत्र का भाग है जो संबंधित है( a ) पोषण
( b ) श्वसन
( c ) उत्सर्जन
( d ) परिवहन प्रश्न
उत्तर 1 : ( c ) उत्सर्जन
2 : पादप में जाइलम उतरदायी है
( a ) जल का वहन
( b ) भोजन का वहन
( c ) अमीनो अम्ल का वहन
( d ) ऑक्सीजन का वहन
उत्तर 2 : ( a ) जल का वहन
प्रश्न 3 : स्वपोषी पोषण के लिए आवश्यक है
( a ) कार्बन डाइऑक्साइड तथा जल
( b ) क्लोरोफिल
( c ) सूर्य का प्रकाश
( d ) उपरोक्त सभी
उत्तर 3 : ( d ) उपरोक्त सभी
प्रश्न 4 : पयरुवेट के विखंडन से यह कार्बन डाइऑक्साइड , जल तथा ऊर्जा देता है और यह क्रिया होती है
( a ) कोशिका द्रव्य
( b ) माइटोकॉन्ड्रिया
( c ) हरित लवक
( d ) केन्द्रक
उत्तर 4 : ( b ) माइटोकॉन्ड्रिया
प्रश्न 5 : हमारे भोजन में वसा का पाचन कैसे होता है ? यह प्रक्रम कहाँ होता है ?
उत्तर 5
: हमारे भोजन में वसा का पाचन मुख्य रूप से क्षुद्रांत्र में होता है । इस कार्य के लिए क्षुद्रांत , यकृत तथा अग्न्याशय से श्रवण प्राप्त करती है । यहाँ पित्त लवण द्वारा भोजन में उपस्थित वसा की बड़ी गोलिकाओं को छोटी गोलिकाओं में खंडित कर दिया जाता है जिससे एंजाइम की क्रियाशीलता बढ़ जाती है । अग्न्याशय से आने वाला अग्न्याशयिक रस इन छोटी गोलिकाओं वाली वसा को लाइपेज एंजाइम के माध्यम से पचा देता है । एंजाइम अंत में वसा को वसा अम्ल तथा ग्लिसरॉल में परिवर्तित कर देते हैं ।
प्रश्न 6 : भोजन के पाचन में लार की क्या भूमिका है ?
उत्तर 6
: भोजन के पाचन में लार की अहम भूमिका है । आहार का आस्तर बहुत कोमल होता है । लार सम्पूर्ण भोजन में फैल कर उसे चबाने एवं गीला करने में मदद करता है ताकि इसका मार्ग आसान हो जाए । लार में उपस्थित एंजाइम जिसे ऐमिलेस कहते है स्टार्च के जटिल अणुओं को शर्करा में विखंडित कर देता है ।
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प्रश्न 7 : स्वपोषी पोषण के लिए आवश्यक परिस्थितियाँ कौन सी हैं और उनके उपोत्पाद क्या हैं ?
उत्तर 7
: स्वपोषी पोषण के लिए आवश्यक परिस्थितियाँ कार्बन डाइआक्साइड , सूर्य का प्रकाश , जल तथा क्लोरोफिल की उपस्थिति है । कार्बोहाइड्रेट तथा ऑक्सीजन स्वपोषी पोषण के मुख्य उपोत्पाद क्या हैं । क्लोरोफिल तथा सूर्य का प्रकाश 6CO2 + 6H2O क्लोरोफिल सूर्य का प्रकाश→ C6H12O6 + 6O2
प्रश्न 8 : वायवीय तथा अवायवीय श्वसन में क्या अंतर है ? कुछ जीवों के नाम लिखिए जिनमें अवायवीय होता है ।
उत्तर 8
: वायवीय तथा अवायवीय श्वसन में अंतर :
- वायवीय श्वसन
- यह आक्सीजन की उपस्थिति में होता है ।
- गैसों का आदान - प्रदान वातावरण से होता है ।
- श्वसन के उपरांत CO2 तथा H2O उत्सर्जित होते है।
- अवायवीय श्वसन
- यह आक्सीजन की अनुपस्थिति में होता है ।
- गैसों का आदान - प्रदान नहीं होता है ।
- श्वसन के उपरांत CO2 तथा C2H 5OH उत्सर्जित होते है |
अवायवीय श्वसन कुछ जलयुक्त पौधों की जड़ों में , कुछ परजीवी कीड़े में , जानवर की मांसपेशियों में और कुछ सूक्ष्म जीवों जैसे कि खमीर में होता है ।
प्रश्न 9 : गैसों के अधिकतम विनिमय के लिए कुपिकाएँ किस प्रकार अभिकल्पित हैं ?
उत्तर 9
: फेफड़ों के अंदर गुब्बारे जैसी एक संरचना होती है जिसे कूपिका कहते हैं । इसका भीतरी भाग छोटी - छोटी नलिकाओं में विभाजित हो जाती है और ये नलिकाएँ एक विस्तृत सतह का निर्माण करती हैं जिससे गैसों का अधिकतम विनियमम हो सके । कूपिकाओं की भित्ति में रुधिर वाहिकाओं का विस्तृत जल होता है । जब हम सांस लेते हैं तो हमारी वक्षगुहिका बड़ी हो जाती है और वायु विस्तृत कूपिकाओं में भर जाती है । ये कुपिकाएँ फेफड़ों में बहुत कम जगह में स्थित होती है लेकिन जब इनमे हवा भर जाती है तो ये फूलकर बड़े क्षेत्रफल में फैल जाती हैं और गैसों के विनिमय के लिए अधिकतम क्षेत्रफल प्रदान करती हैं ।
प्रश्न 10 : हमारे शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी के क्या परिणाम हो सकते हैं ?
उत्तर 10
: हिमोग्लोबिन का मुख्य कार्य हमारे शरीर की समस्त कोशिकाओं तक आक्सीजन पहुचना होता है । हिमोग्लोबिन की कमी के कारण शरीर में समस्त भागों तक ऑक्सीजन पर्याप्त मात्रा में नहीं पहुँचाया जा सकता है । जिसके कारण शरीर के विभिन्न अंगों को कार्य करने के लिए आवश्यक उर्जा नहीं मिल पाएगी और हमें कमजोरी तथा थकान का अनुभव होने लगता है ।
प्रश्न 11 : मनुष्य में दोहरा परिसंचरण की व्याख्या कीजिए यह क्यों आवश्यक है ?
उत्तर 11
: मनुष्य तथा अन्य कोशकीय जीवों में रक्त हृदय में दो बार प्रवाहित होता है इसलिए इस प्रक्रिया को दोहरा परिसंचरण कहते है । हृदय में चार कोष्टकिय अंग होते हैं । इसके ऊपर दो कोष्टक अंगों को अलिंद तथा नीचे के दो कोष्टक अंगों को निलय कहते है । ऑक्सीजन प्रचुर रुधिर फुफ्फुस से हृदय में बाईं ओर स्थित कोष्ठ ( बायाँ अलिंद ) में आता है । इस रुधिर को एकत्रित करते समय बायाँ अलिंद शिथिल रहता है । जब अगला कोष्ठ ( बायाँ निलय ) फैलता है तब यह संकुचित होता है जिससे रुधिर इसमें स्थानांतरित होता है । जब पेशीय बायाँ निलय संकुचित होता है , तब रुधिर शरीर में पंपित हो जाता है । इसी प्रकार जब दायाँ अलिंद फैलता है तो शरीर से विआक्सिजनित रुधिर इसमें आ जाता है । जैसे ही दायाँ अलिंद संकुचित होता है , दायाँ निलय फ़ैल जाता है । यह रुधिर को दाएँ निलय में स्थानांतरित कर देता है । इस प्रकार सम्पूर्ण शरीर में हृदय से रक्त संचरण होता रहता है ।
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| चित्र 6.10मानव हृदय का व्यवस्थात्मक काट दृश्य |
प्रश्न 12 : जाइलम तथा फ्लोएम में पदार्थों के वहन में क्या अंतर है ?
उत्तर 12
: जाइलम तथा फ्लोएम में पदार्थों के वहन में अंतर :
- जाइलम
- जाइलम पौधों में जल तथा खनिज लवण का वहन करता है
- जल का वहन जड़ से ऊपर की ओर होता है ।
- जाइलम द्वारा जल का वहन साधारण भौतिक बलों जैसे वाष्पोत्सर्जन आदि द्वारा होता है।
- फ्लोएम
- यह पौधों में तैयार भोजन को विभिन्न भागों तक पहुँचता है ।
- पत्तियों में तैयार भोजन का वहन सभी दिशाओं में होता है।
- फ्लोएम द्वारा भोजन के वहन में ऊर्जा ( ATP के रूप में ) की आवश्यकता होती है ।
प्रश्न 13 : फुफ्फुस में कूपिकाओं की तथा वृक्क में वृक्काणु ( नेफ्रान ) की रचना तथा क्रियाविधि की तुलना कीजिए ।
उत्तर 13
: फुफ्फुस में कूपिकाओं की तथा वृक्क में वृक्काणु ( नेफ्रान ) की रचना तथा क्रियाविधि की तुलना :
- कूपिका
- फुफ्फुस में कूपिकाएँ छोटे - छोटे गुब्बारे जैसी संरचनाएँ होती हैं ।
- कूपिकाओं की दीवारें एक कोशिका जितनी ही मोटी होती हैं और इसमें रक्त केशिकाओं का गुच्छ होता है।
- कूपिकाएँ एक सतह उपलब्ध कराती हैं जिससे गैसों (CO2 और O2) का विनिमय होता है ।
- वृक्काणु ( नेफ्रान )
- वृक्क में वृक्काणु ( नेफ्रान ) नलिका के आकर के निस्पंदन एकक होते हैं ।
- फुफ्फुस की तरह ही , बहुत पतली भित्ति वाली रुधिर केशिकाओं का गुच्छ होता है । गुच्छ होता है ।
- नाइट्रोजनी वर्ज्य पदार्थ जैसे यूरिया या यूरिक अम्ल आदि को छानकर अलग किया जाता है । ग्लूकोस , एमिनो अम्ल , लवण और प्रचुर मात्रा में जल का पुनरवशोषण होता है ।
Best of luck 👍
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